श्री गिरीशानन्द जी महाराज

वृन्दावन में दिनांक 7 से 13 जुलाई तक ‘श्रीमद्भागवत’ कथा का आयोजन श्रीमती साधना एवं श्री विजय गुप्ता द्वारा किया गया। कथाकार परम श्रद्धेय पूज्य गुरुदेव ‘जगद्गुरु’ स्वामी श्री गिरीशानन्द जी महाराज के चरणारबिंदु में समर्पित कुछ शब्द इस प्रकार है, जिन्होंने कथा को अविस्मरणीय बना दिया।
विधाता की अद्भुत विरंचना में ‘क्षण’ वह अतुलनीय वरदान है, जिसकी पग-पग पर प्रत्येक मनुष्य को रोमांच, विस्मय, उल्लास, विलास, विलाप और अनुराग की अनुभूति होती है।
पृथ्वी, पावक, उदधि, अम्बर और पवन जैसे पंचमहाभूत के संयोजन से उत्कृष्ट ‘मनुष्य’ की रचना करते समय ईश्वर भी असमंजस की स्थिति में रहा होगा कि ज्ञान भी, गंगा भी तुम में समाहित है, विचारों की मलीनता भी तुम्हारे हृदय में, द्वेष की पराकाष्ठा भी तुम हो, कपट की दुर्गन्ध भी, स्व पुष्प की सुगंध भी; परन्तु आचार-विचार, व्यवहार और विद्वता की इस शृंखला के मध्य सृष्टि की संरचना के कुसुम सरोवर’ में जब कीच के मध्य कोई कमल खिलता है, तब उसकी आभा पूरे वातावरण को आप्लावित करती है, जिसे देखकर दृष्टा की दृष्टि भी दिव्य ज्योति से प्रकाशित हो जाती है।
नीलाभ में जिस प्रकार ध्रुव तारा अटल है, दिव्य कलानिधि की आभा अटल है, वैसे ही दिव्य प्रकाश-पुंज पूज्य स्वामी जी अखण्डानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य, श्री रोटी राम बाबा जी द्वारा निर्देशित, श्रद्धेय स्वामी श्री सच्चिदानन्द जी महाराज द्वारा दीक्षित परमाराध्य स्वामी श्री ‘गिरीशानन्द’ जी महाराज की वाणी का प्रभाव भी अटल है, जिनकी अमृतवाणी से श्री हरि के धाम में जन मानस का रोम-रोम पुलकित हो रहा है।
शब्दों और भावों की निर्झरी जब गुरुदेव के मुख से किसी अमृत धारा के समान प्रवाहित होती है, तब वातावरण की स्तब्धता इस सरिता के किल्लोल और निनाद को दर्शाती है। अद्भुत वाक्पटुता से ‘पद्मनाभ’ के विभिन्न स्वरूपों का कथन अवर्णनीय है।
व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं होता, मुखारविन्द वह आईना है जिसमें ईश्वर की छवि के सिवा और कोई प्रतिबिंब दिखाई नहीं देता। यहाँ तक कि स्वयं की छवि भी कुछ पल के लिए धूमिल हो जाती है, बस कृष्ण ही नर्तक बनकर इत-उत नृत्य करते हुए नज़र आते हैं। १४ वर्ष की आयु से भक्ति और आसक्ति की ज्ञान-गंगा गुरुदेव ने प्रवाहित की। श्रीराम-कथा, श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीमद्भगवद्गीता आदि महान ग्रंथों का गुरुदेव ने जो प्रचार-प्रसार किया, वो हर व्यक्ति के जीवन का आह्लाद है, उत्कंठा है, जिजीविषा है, अंधकार से प्रकाश में ले जाने का पथ है। जिस प्रकार सागर अनंत है, भागीरथी अनंत है, उसी प्रकार गुरुदेव का ज्ञान अनंत है।
कालीकाल के प्रभाव से मनुष्य की बुद्धि के पाश को काटने का कार्य हमारे संत-महात्माओं की प्रेरणा है, जो कभी न कभी मानव जीवन को कुमार्ग से सुमार्ग की ओर ले जाकर मानव जीवन की सार्थकता को प्रेरित कर जीवन के हर ‘क्षण’ को आनंदित करेंगी और ‘क्षण’ की उपयुक्त परिभाषा से चरितार्थ करेंगी।
वेद, वेदांग, उपनिषद, गीता, रामायण आदि ग्रंथों से ओतप्रोत, ऋषियों की तपोस्थली, रत्नगर्भा यह भारतभूमि संत महात्माओं की भी जननी है जिन्होंने गोरक्षा, नारी रक्षा एवं विभिन्न कुरीतियों के विरुद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक प्रचार करके इस धरा को अभिभूत किया है। कालनेमी हर युग में अवतारित होते रहेंगे। स्वयं इतिहास इस बात का प्रमाण है, किन्तु अवनी भी इस ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकती, जब गुरुदेव सरीखे संत भगवंत रूप में अवतारित होकर समाज को एक नई दिशा देते रहेंगे।
प्रकरण राम मंदिर चढ़ावे का हो, संत पर आक्षेप या पटाक्षेप का, उनकी आलोचना या अपमान का, विकृत मानसिकता वालों के लिए यह राजनीतिक विवेचना या विवाद का विषय कदापि नहीं होना चाहिए, यह तो संततियों के विलाप का विषय है।
कामी, क्रोधी, कपटी और कुत्सित मानसिकता वाले व्यक्तित्व जो समाज का पथभ्रष्ट कर रहे हैं, पूज्य गुरुदेव जैसे संतों का सान्निध्य लेकर उन्हें जीवन की उपयुक्तता को समझकर ईश्वर की आराधना में लगाना चाहिए।

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  1. Vinayak Trivedi Avatar

    Hare Krishna !!

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